भारत बनेगा वैश्विक खेल सामग्री निर्माण का हब, सरकार ने 500 करोड़ का प्रावधान किया
भारत सरकार ने खेल सामग्री निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है, जिससे देश वैश्विक निर्माण केंद्र बन सकेगा।

भारत सरकार ने वैश्विक स्तर पर खेल सामग्री निर्माण के क्षेत्र में देश की स्थिति मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बजट 2026-27 में इस उद्देश्य के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस फंडिंग से देश में हाई क्वालिटी खेल उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में मदद मिलेगी।
खेल उद्योग के विकास के लिए बड़ी योजना
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'खेलो इंडिया' मिशन को मजबूत करने और 'समर्थ पहल' शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत क्रिकेट बैट, हॉकी स्टिक, फुटबॉल, जिम उपकरण सहित विभिन्न खेल सामग्रियों के घरेलू उत्पादन पर जोर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं जैसे 2026 एथलेटिक्स चैंपियनशिप, 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और संभावित 2036 ओलंपिक के लिए देश में ही उच्च गुणवत्ता वाले खेल उपकरण तैयार किए जा सकें।
निर्यात और रोजगार के आंकड़े
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 3,378.49 करोड़ रुपये मूल्य की खेल सामग्री का निर्यात किया। देश में इस उद्योग से लगभग 5 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। वर्तमान में भारतीय खेल सामग्री कंपनियों का सालाना टर्नओवर लगभग 57 हजार करोड़ रुपये है, जिसके 2030 तक 90,420 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
मेरठ और जालंधर हैं प्रमुख केंद्र
भारत में खेल सामग्री निर्माण का इतिहास 1883 से जुड़ा है, जब पहली बार सियालकोट (अब पाकिस्तान) में इस उद्योग की शुरुआत हुई थी। वर्तमान में उत्तर प्रदेश का मेरठ और पंजाब का जालंधर इस क्षेत्र के प्रमुख हब हैं। मेरठ में 35,200 से अधिक पंजीकृत इकाइयां हैं, जो देश के कुल खेल सामग्री निर्यात का 40% उत्पादन करती हैं। जालंधर में 3,000 से अधिक इकाइयां हैं जो हाथ से सिली गेंदों और सुरक्षात्मक गियर के निर्माण में विशेषज्ञता रखती हैं।
चीन को चुनौती देने की क्षमता
वैश्विक स्तर पर खेल सामग्री निर्माण में चीन का वर्चस्व है, जिसकी 2024 में 1,650 करोड़ रुपये मूल्य की निर्यात हुई। भारत वर्तमान में एशिया में तीसरा सबसे बड़ा निर्माता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की नई पहल और निवेश से भारत इस क्षेत्र में चीन को प्रतिस्पर्धा दे सकता है।
उद्योग की चुनौतियां और मांगें
खेल सामग्री निर्माताओं ने सरकार से कच्चे माल पर जीएसटी दर 18% से कम करने और सस्ती दरों पर जमीन उपलब्ध कराने की मांग की है। उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि कश्मीरी विलो (जिससे क्रिकेट बैट बनते हैं) की उपलब्धता में समस्याएं हैं, जिसके कारण इंग्लिश विलो का आयात करना पड़ता है।
भारतीय खेल उद्योग का भविष्य
सरकार के इस कदम से न केवल घरेलू खेल उद्योग को बल मिलेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की स्थिति भी मजबूत होगी। यह पहल देश को खेल सामग्री निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले वर्षों में इससे रोजगार सृजन, तकनीकी नवाचार और निर्यात में वृद्धि की संभावनाएं हैं।


