भारत बनेगा ग्लोबल स्पोर्ट्स मैन्युफैक्चरिंग हब, वैलोरेंट जैसे ईस्पोर्ट्स को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
केंद्र सरकार ने खेल उपकरण निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है, जिससे ईस्पोर्ट्स इंडस्ट्री समेत पूरे खेल क्षेत्र को लाभ होगा।

भारत सरकार ने देश को ग्लोबल स्पोर्ट्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में पेश किए गए बजट में खेल उपकरण निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 500 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है। यह निर्णय न सिर्फ पारंपरिक खेलों बल्कि वैलोरेंट जैसे ईस्पोर्ट्स के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगा।
सरकार की महत्वाकांक्षी योजना
केंद्र सरकार ने 'खेलो इंडिया' मिशन के तहत 'समर्थ पहल' शुरू करने का निर्णय लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य क्रिकेट बैट, हॉकी स्टिक, फुटबॉल जैसे पारंपरिक खेल उपकरणों से लेकर जिम उपकरणों और ईस्पोर्ट्स गेमिंग पेरीफेरल्स तक का घरेलू उत्पादन बढ़ाना है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत में हाई क्वालिटी के सस्ते स्पोर्ट्स गुड्स तैयार होते हैं, जिससे देश इस क्षेत्र में ग्लोबल हब बनने की पूरी क्षमता रखता है।
ईस्पोर्ट्स इंडस्ट्री के लिए स्वर्णिम अवसर
इस योजना से वैलोरेंट जैसे ईस्पोर्ट्स टूर्नामेंट्स को विशेष लाभ मिलेगा। भारत में ईस्पोर्ट्स की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए अब गेमिंग पेरीफेरल्स, हाई-एंड ग्राफिक्स कार्ड्स, गेमिंग चेयर्स और प्रोफेशनल गेमिंग सेटअप्स जैसे उपकरणों के घरेलू उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे घरेलू ईस्पोर्ट्स टीमों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के उपकरण सस्ती दरों पर उपलब्ध होंगे और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन नई ऊंचाइयों को छूएगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
भारत में खेल सामग्री उद्योग का इतिहास 1883 से जुड़ा है जब सियालकोट (अब पाकिस्तान) में पहली बार स्पोर्ट्स गुड्स का निर्माण शुरू हुआ। वर्तमान में भारत एशिया में तीसरा सबसे बड़ा खेल सामग्री निर्माता देश है। देश में स्पोर्ट्स गुड्स इंडस्ट्री ने पिछले 6 दशकों में उल्लेखनीय विकास किया है और अब यह 318 विभिन्न प्रकार के खेल उत्पादों का निर्माण करती है।
रोजगार और आर्थिक लाभ
वर्तमान में भारतीय स्पोर्ट्स गुड्स इंडस्ट्री में करीब 5 लाख लोगों को सीधे रोजगार मिला हुआ है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और कमजोर वर्ग के लोग शामिल हैं। सरकार का अनुमान है कि इस नई योजना से रोजगार के अवसर और बढ़ेंगे। स्पोर्ट्स गुड्स इंडस्ट्री का वर्तमान सालाना टर्नओवर 57 हजार करोड़ रुपये है, जिसके 2030 तक 90 हजार 420 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। साल 2024-25 में भारत ने 3,378.49 करोड़ रुपये के खेल सामान का निर्यात किया था।
मेरठ और जालंधर हैं प्रमुख केंद्र
भारत में खेल उपकरण निर्माण का 75-80% हिस्सा अकेले मेरठ और जालंधर से आता है। उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला स्पोर्ट सिटी के नाम से प्रसिद्ध है जहां 35,200 से अधिक रजिस्टर्ड स्पोर्ट्स गुड्स यूनिट हैं। पंजाब का जालंधर दूसरा बड़ा हब है जहां 3,000 से अधिक इकाइयां काम कर रही हैं। इन केंद्रों पर अब ईस्पोर्ट्स उपकरणों के निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की बढ़ती भूमिका
इस नीति से भारत वैश्विक स्पोर्ट्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में अपनी स्थिति मजबूत करेगा। वैलोरेंट जैसे ईस्पोर्ट्स टूर्नामेंट्स के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि बेहतर उपकरणों की उपलब्धता से खिलाड़ियों का प्रदर्शन नई ऊंचाइयों को छुएगा। साथ ही, इससे ईस्पोर्ट्स इंडस्ट्री को व्यवस्थित ढांचा मिलेगा और नए टैलेंट को प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार की इस पहल से इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा और ग्लोबल स्पोर्ट्स सप्लाई चेन में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
चुनौतियां और समाधान
स्पोर्ट्स गुड्स एवं टॉयज एक्सपोर्ट प्रमोर्शन काउंसिल के चेयरमैन सुमनेश अग्रवाल का कहना है कि सरकार को इकाई लगाने के लिए सस्ती दरों पर जमीन उपलब्ध करानी चाहिए। उद्यमियों का यह भी मानना है कि स्पोर्ट्स गुड्स सहित तमाम कच्चे उत्पादों पर 18% तक जीएसटी है, जबकि तैयार माल पर 5% जीएसटी है। इसे कम किया जाना चाहिए। कारोबारियों को कश्मीर विलो की उपलब्धता को लेकर भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।


